I praise Agni, the high priest of sacrifice, the divine priest, the bestower of treasures.
मैं अग्नि की स्तुति करता हूं. वे यज्ञ के पुरोहित, दानादि गुणों से युक्त, यज्ञ में देवों को बुलाने वाले एवं यज्ञ के फल रूपी रत्नों को धारण करने वाले हैं. (१)
May the divine fire grant us wealth, strength, and ever-increasing prosperity, bestowing glory and heroic progeny.
अग्नि की कृपा से यजमान को धन मिलता है. उन्हीं की कृपा से वह धन दिनदिन बढ़ता है. उस धन से यजमान यश प्राप्त करता है एवं अनेक वीर पुरुषों को अपने यहां रखता है. (३)
O Agni, be as a father to us, a benevolent guide. May you lead us to well-being and prosperity.
हे अग्नि! जिस प्रकार पुत्र पिता को सरलता से पा लेता है, उसी प्रकार हम भी तुम्हें सहज ही प्राप्त कर सकें. तुम हमारा कल्याण करने के लिए हमारे समीप निवास करो. (९)
O Indra, come, invoked by intellect, urged by the wise, and with your Soma-drink, approach our hymns.
हे इंद्र! तुम हमारी भक्ति से आकर्षित होकर इस यज्ञ में आओ. ब्राह्मण तुम्हारा आह्वान कर रहे हैं. तुम सोम रस लिए हुए वाघत नामक पुरोहित की प्रार्थना सुनने के लिए आओ. (५)
O divine beings, upholders of all creation, come forth! Accept the offerings of the devoted sacrificer and bless his son.
हे विश्वेदेवगण! तुम मनुष्यों के रक्षक एवं पालन करने वाले हो. अव्ययदाता यजमान ने सोम रस तैयार कर लिया है, तुम इसे ग्रहण करने के लिए आओ. तुम लोगों को यज्ञ का फल देने वाले हो. (७)
Come to our libations, O drinker of Soma, and drink the Soma. May this intoxicating Soma bring us cows and strength, O Indra.
हे सोमपान करने वाले इंद्र! तुम सोमपान के लिए हमारे त्रिवर्ण यज्ञ के पास आओ.
Mandala 1 · Verse 3
अथा ते अन्तमानां विद्यम सुमतीनाम्. मा नो अति ख्य आ गहि.. (३)
May we attain the favor of those who possess good intellect and wisdom. Do not overlook us or pass us by.
हे इंद्र! हम सोमरस पान करने के पश्चात् तुम्हारे अत्यंत समीपवर्ती एवं शोभन-बुद्धि वाले लोगों के बीच रहकर तुम्हें जानें. तुम भी हमें छोड़कर दूसरों को दर्शन मत देना. तुम हमारे समीप आओ. (३)
This offering, the support of sacrifice, brings joy to men; it is a friend that, though it may slow down, does not fall.
यह सोमरस तुरंत नशा करने वाला एवं यज्ञ की शोभा है. यह मनुष्यों को मस्त करने वाला, कार्यसाधक और आनंददाता इंद्र का मित्र है. यज्ञ में व्याप्त इंद्र को यह सोमरस दो. (७)
The radiant ones, moving and stationary, unite and shine brightly in the heavens.
जो इंद्र तेजस्वी सूर्य के रूप में, अहिंसक अग्नि के रूप में तथा सर्वत्र गतिशील वायु के रूप में स्थित हैं, सब लोकों में निवास करने वाले प्राणी उन्हीं इंद्र से संबंध रखते हैं. उन्हीं इंद्र की मूर्ति आकाश में नक्षत्रों के रूप में चमकती है. (१)
The divine steeds, red and powerful, draw His chariot, fulfilling desires and conquering all opposition.
सारथि उन इंद्र के रथ में हरि नाम के सुंदर, रथ के दोनों ओर जोड़ने योग्य, लाल रंग के और शक्तिशाली दो घोड़ों को जोड़ते हैं. वे घोड़े इंद्र एवं उनके सारथि को ढोने में समर्थ हैं. (२)
You, the radiant one, illuminate the unilluminated, bestowing beauty upon the formless. You are born, breaking through all limitations.
हे मनुष्यो! यह आश्चर्य देखो कि यह इंद्र रात को बेहोश प्राणियों को प्रातः: होश में लाते हुए और रात में अंधकार के कारण रूपहीन पदार्थों को प्रातः: रूप प्रदान करते हुए सूर्य रूप में किरणें बिखेरते हैं. (३)
The divine consciousness, like a hidden jewel, is discovered by those who are pure and strong in their inner resolve.
हे इंद्र! तुमने मरुद्गण के साथ मिलकर गुफा में छिपाई हुई गायों को खोजकर वहां से निकाला। वे मरुद्गण दृढ़ स्थान को भी भेदन करने एवं एक स्थान की वस्तु को दूसरी जगह में ले जाने में समर्थ हैं. (५)
When the gods, desiring wisdom, uttered these profound words, the wise ones listened attentively.
स्तुति करने वाले लोग स्वयं देवभाव प्राप्त करने की इच्छा से धन के स्वामी, शक्तिशाली एवं विख्यात मरुद्गण को लक्ष्य करके उसी प्रकार स्तुति कर रहे हैं, जिस प्रकार वे इंद्र की स्तुति करते हैं. (६)
Facing the flawless, the Lord of the Gaṇas, with his divine attendants, moves with great power.
यह यज्ञ दोषरहित, देवलोक में निवास करने वाले तथा फल देने के कारण कामना करने योग्य मरुद्गण के साथ होने के कारण इंद्र को बलवान् समझकर पूजा-अर्चना करता है. (८)
From the sky's bright expanse, let the praises ascend, for in this sacred space, hymns are harmoniously offered.
हे चारों ओर व्यापक मरुद्गण! तुम द्युलोक, आकाश या दीप्त सूर्य मंडल से इस यज्ञ में आओ. पुरोहित-समूह इस यज्ञ में तुम्हारी भली प्रकार स्तुति कर रहा है. (९)
Mandala 1 · Verse 10
इतो वा सातिमीमहे दिवो वा पार्थिवादधि. इन्द्रं महो वा रजसः.. (१०)
We seek the divine light from the heavens or the earth, or the great radiance of the firmament.
हम इंद्र देव की प्रार्थना इसीलिए करते हैं कि वे पृथ्वीलोक, आकाश या वायुलोक से हमें धन प्रदान करते हैं. (१०)
The singers praise Indra; the hymn-makers glorify Indra. The voices sing of Indra.
सामवेद का गान करने वालों ने सामगान के द्वारा, ऋग्वेद का पाठ करने वालों ने ऋचाओं द्वारा और यजुर्वेद का पाठ करने वालों ने मंत्रों द्वारा इंद्र की स्तुति की है. (१)
O Indra, in our battles and our thousandfold victories, be our powerful protector with your mighty boons.
हे शत्रुओं द्वारा न हारने वाले इंद्र! अपनी अमोघ रक्षण शक्ति के द्वारा ऐसे महायुद्धों में हमारी रक्षा करो जो हजारों गर्जों, अस्त्रों आदि का लाभ देने वाले हों। (४)
We invoke Indra, the great giver, the mighty wielder of the thunderbolt, who is the ally in battles against the Vritras.
इंद्र हमारी सहायता करने वाले तथा धन-लाभ का विरोध करने वाले हमारे शत्रुओं के लिए वज्रधारी हैं. हम अल्प अथवा विपुल धन पाने के लिए हम इंद्र का आह्वान करते हैं. (५)
May that divine power, which is the protector of all, bestow upon us strength and protection against all obstacles.
हे इंद्र! तुम हमारे लिए इच्छित फल देने वाले तथा वृष्टि प्रदान करने वाले हो. तुम हमारे लाभ के लिए उस मेघ का मर्दन करो. तुमने कभी भी हमारी प्रार्थना अस्वीकार नहीं की है. (६)
Even the most powerful praises cannot reach the might of Indra's thunderbolt. His greatness is beyond all human hymns of praise.
भिन्न-भिन्न फल देने वाले देवताओं के लिए जिन उत्तम स्तुतियों का प्रयोग किया जाता है, वे सब वज्र धारण करने वाले इंद्र के लिए हैं. इंद्र के अनुरूप स्तुति को मैं नहीं जानता. (७)
Like a bull in a herd, the strong one advances, the ruler, unhindered.
जिस प्रकार तेज चाल वाला बैल धेनु समूह को अपने बल से अनुगृहीत करता है, उसी प्रकार इच्छाओं को पूरा करने वाले इंद्र मनुष्यों को शक्तिशाली बनाते हैं. इंद्र समर्थ हैं एवं किसी की प्रार्थना को ठुकराते नहीं हैं. (८)
O Indra, grant us abundant wealth and strength, the ever-present, the most powerful, for our protection.
हे इंद्र! हमारी रक्षा के लिए ऐसा धन दो जो हमारे भोग के योग्य, शत्रुओं को विजय करने में सहायक तथा शत्रुओं की हार का कारण बने. (१)
Mandala 1 · Verse 2
नि येन मुष्टिहृत्या नि वृत्रा रुणधामहे, त्वोतासो न्यर्वता.. (२)
By whom, having grasped with our fists, we obstruct Vritra, protected by you, we shall overcome.
उस धन से एकत्र किए गए योद्धाओं के मुक्के की चोट से हम शत्रु को रोक देंगे. तुम्हारे द्वारा सुरक्षित होकर हम घोड़ों की सहायता से शत्रुओं को दूर भगाएंगे. (२)
May Indra, the wielder of the thunderbolt, be greatly glorified with immense power and strength.
इंद्र देव शरीर से बलिष्ठ एवं गुणों से युक्त होने के कारण महान् हैं. वज्रधारी इंद्र को पूर्वोक्त महत्त्व प्राप्त हो. इंद्र की सेना आकाश के समान विस्तृत हो. (५)
Mandala 1 · Verse 6
समोहे वा य आशत नरस्तोक्सस्य सनितौ, विप्रासो वा धियावः.. (६)
Whether a man, or a child, or the wise, all are subject to delusion.
जो वीर पुरुष युद्धक्षेत्र में जाने वाले हैं, पुत्र पाने की इच्छा रखते हैं अथवा जो बुद्धिमान् ज्ञान की अभिलाषा रखते हैं, वे सब इंद्र की कृपा से सिद्धि प्राप्त करें. (६)
Mandala 1 · Verse 7
यः क्षिः सोमपातमः समुद्र इव पिन्वते, उर्वीरापो न काकुदः.. (७)
He who drinks Soma, swells like the ocean, and the waters flow forth like a mother's milk.
इंद्र का जो उदर सोम-रस पीने के लिए सदा तत्पर रहता है, वह समुद्र के समान विस्तृत है. जिस प्रकार जीभ का पानी कभी नहीं सूखता, उसी प्रकार इंद्र के उदर में स्थित सोम-रस भी कभी नहीं सूखता. (७)
Mandala 1 · Verse 8
एवा ह्यस्य सूतता विरष्णी गोमती मही. पक्वा शाखा न दाशुषे.. (८)
She is indeed the mother, the giver of life, the earth, and the great nourisher. She is the ripe fruit for the devoted giver.
इंद्र के मुख से निकली हुई वाणी सत्य, विविध विशेषताओं से युक्त, महती एवं गौएं देने वाली है, यज्ञ में हव्य देने वाले यजमान के लिए तो इंद्र की वाणी पके हुए फलों से लदी डाली के समान है. (८)
Mandala 1 · Verse 9
एवा हि ते विभूतय ऊतय इन्द्र मावते. सहश्रुति सन्ति दाशुषे.. (९)
Your powers and protections, O Indra, are indeed manifold, and they are present for the giver of offerings.
हे इंद्र! तुम्हारी विभूतियां हव्य प्रदान करने वाले हमारे समान यजमान की रक्षा करने वाली एवं शीघ्र फल देने वाली हैं. (९)
He rained down blessings with joyous hymns and offerings in the Soma sacrifices.
हे सुंदर नासिका एवं ठोंडी वाले तथा समस्त यजमानों द्वारा पूज्य इंद्र! तुम आनंद बढ़ाने वाली स्तुतियों से प्रसन्न होकर इस सवन नामक यज्ञ में पधारो. (३)
Mandala 1 · Verse 4
अस्मग्रमिन्द्र ते गिरः प्रति त्वामुदह्रासत. अजीषा वृष्भं पतितम्.. (४)
O Indra, our hymns are offered to you, the mighty bull, who has been praised.
हे इंद्र! मैंने तुम्हारी स्तुतियां की हैं. वे तुम्हारे समीप स्वर्ग में पहुंच गई हैं. तुमने उन स्तुतियों को स्वीकार कर लिया है. तुम मनचाही वर्षा करने वाले एवं यजमान के रक्षक हो. (४)
Praise Indra, the lord of wealth and brilliance, with hymns, the giver of sustenance.
अपने धन की रक्षा करने के लिए हम स्तुतियों द्वारा इंद्र को बुलाते हैं. इंद्र धन के रक्षक, ऋचाओं से प्रेम करने वाले एवं यज्ञस्थान में गमन करने वाले हैं. (९)
The singers sing of You, the worshippers honor the Sun, and the Brahmins, O Indra, have established You as the supreme goal.
हे शतक्रतु इंद्र! उद्गाता तुम्हारी स्तुति करते हैं. पूजाथं मंत्र बोलने वाले होता पूजा के योग्य इंद्र की अर्चना करते हैं. जिस प्रकार बांस के ऊपर नाचने वाले कलाकार बांस को ऊपर उठाते हैं, उसी प्रकार स्तुति करने वाले ब्राह्मण तुम्हारी उन्नति करते हैं. (१)
As the mountain peak is ascended, much becomes clear. So Indra, the divine, understands the purpose, like a strong bull leading the herd.
Mandala 1 · Verse 3
युक्ष्वा हि केशिना हरी वृषणा कक्ष्या अथा न इन्द्र सोमपा गिरामुपश्रुति चर.. (३)
O Indra, the drinker of Soma, yoke your swift, powerful horses, and listen to our hymns.
हे सोमपानकर्ता इन्द्र! अपने केशर वाले, युवा एवं पुष्ट शरीर वाले घोड़ों को रथ में जोड़ो. इसके पश्चात् हमारी स्तुतियाँ सुनने के लिए समीप आओ. (३)
Mandala 1 · Verse 4
एहि स्तोमों अभ् स्विराभि गृणीह्या रुव. ब्रह्म च नो वसो सचेन्द्र यज्ञं च वर्धय.. (४)
O Indra, with your mighty powers, praise and proclaim your greatness. Bless our hymns and increase our sacrifice.
हे सर्वव्यापक इन्द्र! इस यज्ञ में आओ. उद्गाता द्वारा की हुई स्तुति की प्रशंसा करो, अश्वयुं की स्तुतियों का समर्थन करो और अपने शब्दों से सबको आनंद दो. इसके पश्चात् हमारे अन्न के साथ-साथ इस यज्ञ को भी बढ़ाओ. (४)
Praise the hymn for Indra, the increaser, the one who is praised. As Indra, eager for the soma, rejoices with his friend.
अगणित शत्रुओं को रोकने वाले इन्द्र के लिए गाए गए गीत वृद्धि पाते रहें. इन गीतों के कारण शक्तिशाली इन्द्र हमारे पुत्रों एवं मित्रों के मध्य महान् शब्द करें. (५)
O Indra, you are the protector of all, the giver of strength and light. Increase the herds of cows and bestow upon us abundant wealth.
हे इन्द्र! तुम्हारे द्वारा दिया हुआ अन्न सर्वत्र फैला हुआ और सुविधापूर्वक मिलने वाला है. हे वज्र धारण करने वाले इन्द्र! दूध, घी आदि रस के लाभ के लिए गौशाला का द्वार खोलो और हमें धन प्रदान करो. (७)
Neither the two worlds nor the heavens can conquer you, O powerful one, who are the source of all strength. You are the protector of all beings, and all things are established in you.
हे इन्द्र! जिस समय तुम शत्रु का वध करते हो, उस समय धरती और आकाश दोनों में
Hear my invocation, O Indra, and accept my praises, for I have called upon you with devotion. Strengthen my resolve and accept this hymn.
हे इंद्र! तुम्हारे दोनों कान चारों ओर की बात सुनने वाले हैं, इसलिए हमारी पुकार जल्दी सुनो. हमारी स्तुतियों को अपने मन में स्थान दो. जिस प्रकार मित्र की बातें स्मरण रहती हैं, उसी प्रकार हमारी ये स्तुतियां भी अपने पास रखो. (९)
O powerful and widely invoked one, we call upon you, the bestower of strength, for your swift and abundant protection.
हे इंद्र! हम तुम्हें जानते हैं कि तुम मनचाही वर्षा करते हो तथा युद्धस्थल में हमारी प्रार्थना सुनते हो. तुम समस्त कामनाओं को पूर्ण करने वाले हो. हम हजारों प्रकार के धन देने वाली तुम्हारी रक्षा का आह्वान करते हैं. (१०)
He who is the best of charioteers, the lord of wealth and strength, has been praised with hymns, and is the protector of all.
सागर के समान विस्तृत रथ के स्वामियों में श्रेष्ठ, अन्यों के स्वामी एवं सबके पालक इंद्र को हमारी स्तुतियों ने बढ़ाया था. (१)
Mandala 1 · Verse 2
सखे त इन्द्र वाजिनो मा भैम श्वासस्पते. त्वामभि प्र णीणुमो जेतारमपराजितम्.. (२)
O friend Indra, mighty and life-giving, let us not fear; we praise you, the victorious and unconquered.
हे बल के स्वामी इंद्र! तुम्हारी मित्रता पाकर हम शक्तिशाली एवं निर्भय बनें. तुम अपराजेत विजेता हो. हम तुम्हें नमस्कार करते हैं. (२)
Mandala 1 · Verse 3
पूर्वीरन्द्रस्य راتयो न वि दस्यन्त्युत्तः । यदि वाजस्य गोमतः स्तोतृभ्यो महते मघम्.. (३)
The former glories of Indra, the giver of wealth, do not fade; for the praise-singers, he bestows abundant riches from the cattle-possessing abundance.
इंद्र द्वारा किए गए पुराणकालीन दान प्रसिद्ध हैं. यदि वे स्तुतिकर्ताओं को गायक एवं शक्तिपूर्ण अन्न दान करें तो सब प्राणियों की रक्षा हो सकती है. (३)
Indra, the destroyer of cities, the youthful poet of immeasurable might, the wielder of the thunderbolt, the bestower of many gifts, conquers all actions in the universe.
इंद्र ने पुरभेदकारी, युवा, अमित तेजस्वी, समस्त यज्ञों के धारणकर्ता, वज्रधारक एवं अनेक व्यक्तियों द्वारा स्तुत रूप में जन्म लिया. (४)
You are the cave of the earth, the abode of the cows. The gods, casting aside their fear, have entered you.
हे वज्रधारी इंद्र! तुमने गायों का अपहरण करने वाले बल असुर की गुफा का द्वार खोल दिया था. ब Lastly द्वारा सताए हुए देवों ने उस समय निडर होकर तुम्हें घेर लिया था. (५)
O hero, you are the giver of boons, and the rivers, knowing your greatness, flow towards the ocean, singing your praises.
हे शूर इंद्र! निचोड़े हुए सोम रस के गुणों का वर्णन करता हुआ मैं तुम्हारे धनों से प्रभावित होकर वापस आया हूं. हे स्तुतिपात्र इंद्र! यज्ञकर्ता तुम्हारे समीप उपस्थित होने एवं तुम्हारी कार्यकुशलता को जानते थे. (६)
You, O Indra, with your divine powers, protect yourself from the illusory tricks of the magician. The wise, knowing his deceit, are not ensnared by his illusions.
हे इंद्र! तुमने छल द्वारा मायावी वृष्षण का नाश किया. इस बात को जो मेघावी लोग जानते हैं, तुम उनकी रक्षा करो. (७)
O Agni, harness the swift, reddish horses to your chariot and bring the gods here.
युक्ष्वा ह्यरुषीं रथे हरितो देव रोहितः. तभिर्देवा इहा वह.. (१२) हे अग्नि देव! रोहित नामक गतिशील घोड़ों को अपने रथ में जोड़ो एवं उनके द्वारा देवों को यहां लाओ. (१२)
Mandala 1 · Verse 1
इन्द्र सोमं पिब ऋत.ग्ना त्वा विशन्तिवन्दवः. मत्सरसस्तदोकसः.. (१) हे इंद्र! तुम ऋतु के साथ सोमरस पियो. तृप्तिकारक एवं आश्रययोग्य सोम तुम्हारे शरीर में प्रविष्ट हो. (१)
O Indra, drink the Soma with the cosmic order. May the satisfying and life-sustaining Soma enter your being.
Mandala 1 · Verse 2
मरुतः पिबत ऋत.ग्ना पोत्राद् यज्ञं पुनीतन. यूयं हि छ सुदानवः..
O Maruts, drink the Soma juice offered by the Potri priest, along with the sacred order; you are indeed generous givers. Purify my sacrifice.
मरुतः पिबत ऋत.ग्ना पोत्राद् यज्ञं पुनीतन. यूयं हि छ सुदानवः.. (२) हे मरुगण! पोत्र नामक ऋत्विक द्वारा दिया हुआ सोमरस ऋतु के साथ पिओ. तुम शोभन दानशील हो. तुम मेरे यज्ञ को पवित्र करो. (२)
O householder Tvashta, praise our sacrifice and drink Soma with the seasons. You are indeed the bestower of treasures.
अभि यज्ञं गृणीहि नो न्नावो नेष्टः पिब ऋत.ग्ना. त्वं हि रत्नधा असि.. (३) हे पत्नीयुक्त त्वष्टा! हमारे यज्ञ की प्रशंसा करो एवं ऋतु के साथ सोम पिओ. तुम रत्नदाता हो. (३)
O Agni, invite the gods here to the sacrifice and seat them in their three places; adorn them and drink the Soma with the sacred order.
अग्ने देवा इह सह सादया योनिषु त्रिषु. परि भूष पिब ऋत.ग्ना.. (४) हे अग्नि! देवों को यहां यज्ञ में बुलाओ एवं योनि नामक तीन स्थानों में बैठाओ, उन्हें विभूषित करो एवं ऋतु के साथ सोमरस पिओ. (४)
O Indra, drink the Soma juice from the priest's vessel after the seasons; in you alone is unfailing friendship.
ब्राह्मणादिन्द्र राधसः पिबा सोममूतंर. त्वेद्धि सख्यमस्तृतम्.. (५) हे इंद्र! तुम ऋतुओं के पश्चात् ब्राह्मणच्छंसी पुरोहित के पात्र से सोमपान करो. तुम्हारी मित्रता टूटने वाली नहीं है. (५)
Mandala 1 · Verse 6
युवं दक्षं धृतव्रत मित्रावरुणं दॊळभम्. ऋत.ग्ना यज्ञमाशास्थे.. (६) हे व्रतधारणकर्ता मित्र और वरुण! ऋतु के साथ यज्ञ में आओ. हमारा यज्ञ वृद्धिप्राप्त
O Mitra and Varuna, upholders of vows! Come to the sacrifice with the cosmic order. May our sacrifice prosper.
O Agni, most youthful and powerful, come to protect us with your divine offerings and wisdom.
हे अग्नि! हमारी रक्षा के लिए देवपत्नियों को यहां ले आओ. हे अत्यंत युवा अग्नि! हमें ऐसी वाणी दो, जिससे हम देवों को बुला सकें एवं निषपूर्व सत्य भाषण कर सकें. (१०)
May the Maruts, born from the sound of 'ha' and the touch of lightning, protect us and be our wealth.
चमकने वाली विद्युत से उत्पन्न मरुद्गण हमारी रक्षा करें और हमारे सुख बढ़ावें. (१२)
कस्य नूनं कतमस्यामृतांनां मनामहे चारु देवस्य नाम. को नो म hafAditye पुनर्दार्तिपरं च दृशयें मातरं च.. (१)
Whose name shall we praise, the beautiful name of the immortal gods? Who will grant us again the sight of the radiant Aditya and the Mother?
मैं देवताओं में से किस श्रेणी के किस देवता का सुंदर नाम पुकारूं? कौन देवता मुझे मरने वाले को विशाल धरती पर रहने देगा? जिससे मैं अपने माता-पिता को देख सकूं? (१)
Mandala 1 · Verse 2
अग्नेर्वयं प्रथमस्यामृतांनां मनामहे चारु देवस्य नाम. स नो म hafAditye पुनर्दार्तिपरं च दृशयें मातरं च.. (२)
We praise the beautiful name of Agni, the first of the immortals. May he grant us further vision in the sun and show us our mother.
मैं देवताओं में सबसे पहले अग्नि का नाम पुकारता हूं. वे मुझे इस विशाल धरती पर रहने देंगे, जिससे मैं अपने माता-पिता को देख सकूं. (२)
We, your devotees, with your grace, have begun to reach the crown of prosperity.
हे सूर्य देव! तुम धन के स्वामी हो. यदि तुम रक्षा करो तो हम धन की उन्नति करने में लग जावें. (५)
Mandala 1 · Verse 6
नहि ते क्षत्रं न सहो न मन्युं वयश्ननामि पतयन्त आपुः. नेमा आपो अनभिषं चरन्तीं ये वातस्य प्रमिनन्यभ्.. (६)
The Kshatriya's strength, power, and wrath do not perish when they fall; nor does the water, when it flows, fail to reach the one who is parched by the wind.
हे वरुण देव! आकाश में उड़ने वाले पक्षियों में भी तुम्हारे समान शक्ति और पराक्रम नहीं हैं. इन्हें तुम्हारे बराबर क्रोध भी नहीं मिला है. सर्वदा चलने वाली वायु और बहने वाला जल तुम्हारी गति से आगे नहीं बढ़ सकता. (६)
The wise king Varuna, the protector of the forest, bestows a lofty structure, pure and powerful. Within this structure, the wisdom of these beings is hidden, and their guiding lights reside within us.
शुद्ध बल के स्वामी वरुण मूलरहित आकाश में ठहर कर उत्तम तेज के समूह को ऊपर ही ऊपर धारण करते हैं. उस तेजसमूह की किरणों का मुख नीचे और जड़े ऊपर हैं. उन्हीं के कारण हममें प्राण स्थित रहते हैं. (७)
Mandala 1 · Verse 8
उरुं हि राजा वरुणश्रृकारं सूर्योय पन्यामचेतवा उ. अपदे पादा प्रतिधात्वेऽकरुतापवक्ता हृदयाविश्रि.. (८)
King Varuna has made a vast path, the sun has illuminated it. The feet have been placed where there are no feet, and the heart has been opened to the speaker.
राजा वरुण ने सूर्य के उदय से अस्त तक चलने के लिए मार्ग का विस्तार किया है, उसने आकाश में बिना पैरों वाले सूर्य के चलने के लिए मार्ग बनाया है. वे मेरे हृदय का भेदन करने वाले शत्रु का नाश करें. (८)
May your thousand healing powers, O King, be vast, deep, and well-established. Drive away misfortune far from us, and liberate us from all bonds.
हे राजा वरुण! आपकी औषधियां सैकड़ों-हजारों हैं. आपकी उत्तम बुद्धि विस्तृत और गंभीर हो. तुम हमारा अनिष्ट करने वाले पापों को हमसे दूर रखो. हमने जो पाप किए हैं, उन्हें नष्ट कर दो. (९)
The stars, fixed high above, are visible at night. The unbreakable laws of Varuna are manifest, and the moon shines forth in the darkness.
ऊँचे आकाश में जो सप्तर्षि नामक तारे स्थित हैं, वे रात में दिखाई देते हैं, पर दिन में कहां चले जाते हैं? वरुण देव के कार्यों में कोई बाधा नहीं डाल सकता. वरुण की आज्ञा से ही रात में चंद्रमा प्रकाशित होता है. (१०)
Mandala 1 · Verse 11
अतो विश्वाभ्यःदृढ चिकित्वों अभि पश्यति. कृतानि या च कर्वी.. (११)
He who is wise and discerning sees all that has been created and all that is yet to be created.
बुद्धिमान् मनुष्य वरुण की अनुकंपा से वर्तमान काल और भविष्यत् काल की सारी आश्चर्यजनक घटनाओं को देख लेते हैं. (११)
May Varuna, Mitra, and Aryama, who are protectors and destroyers of evil, be seated among us, just as they are among men.
हे अग्नि देव! शत्रुओं का नाश करने वाले मित्र, वरुण और अर्यमा जिस प्रकार मनु के यज्ञ में आए थे, उसी प्रकार तुम भी हमारे यज्ञ में बिछे हुए कुशों पर बैठो. (४)
O brilliant Agni, you are divided and spread across the waters, and you are pleased with the offerings of the sacrificer.
हे विलक्षण प्रकाश वाले अग्नि देव! जिस प्रकार सिंधु की लहरें जल को सभी पर्वतों, नालियों आदि में भर देती हैं, उसी प्रकार तुम भी लोगों में धन का विभाग करने वाले हो. द्रव्य देने वाले यजमान को तुम कर्म का फल शीघ्र दो. (६)
He who is the controller in battles and the bestower of strength in assemblies, He is the supreme ruler, the hearer of prayers.
हे अग्नि देव! युद्धक्षेत्र में तुम जिस मनुष्य की रक्षा करते हो और तुम्हारी प्रेरणा से जो युद्धक्षेत्र में जाता है, वह नित्य ही अन्न प्राप्त करता रहेगा. (७)
Where the broad-based stone is raised for grinding, O Indra, there the pressing-stones are found.
हे इन्द्र! जिस यज्ञ में सोम रस निचोड़ने के लिए भारी जड़ वाला पत्थर उठाया जाता है और ओखली की सहायता से सोम रस तैयार किया जाता है, वहां सोम रस अपना जानकर पिओ. (१)
Where the mortar and pestle are used, there the sons of the mortar are known, O Indra.
हे इन्द्र! जिस यज्ञ में सोमरस को निचोड़ने के लिए दोनों फलक जाँघों के समान फैल गए हैं, उसी यज्ञ में ओखली द्वारा तैयार किया हुआ सोम रस अपना जानकर पिओ. (२)
Where the rays of the sun are bound like ropes, Indra, you are the lord of the sky.
हे इन्द्र! जिस यज्ञ में सोमरस मंथन करने का दंड घोड़े की लगाम के समान बांधा जाता है, उसी यज्ञ में ओखली द्वारा तैयार किया हुआ सोम रस अपना जानकर पिओ. (४)
Mandala 1 · Verse 5
समिन्र्द गर्दभं मृण नुवन्तं पापयामुया. आ तू न इन्द्र संस्य गोष्वेषु शुष्मिएु सहसेषु तुवीमघ.. (५)
O Indra, the giver of strength, may you come to us with your abundant wealth, protecting our cattle and our possessions.
Mandala 1 · Verse 6
पताति कुण्डण्णाच्या दूरं वातो वनादधि. आ तू न इन्द्र संस्य गोष्वेषु शुष्मिएु सहसेषु तुवीमघ.. (६)
The wind blows far from the forest, O Indra, come to us with your mighty strength and abundant wealth, to our cattle and our heroes.
Mandala 1 · Verse 7
सर्वं परिक्रोशं जहि जम्भया कृकदाश्वम्. आ तू न इन्द्र संस्य गोष्वेषु शुष्मिएु सहसेषु तुवीमघ.. (७)
Conquer all reproach and the roaring foe. Come to us, Indra, with strength in cattle, wealth, and might.
तुम हमारे प्रति क्रोश करने वालों का नाश करो, हमारी हिंसा करने वालों को मार डालो. हे अनंत धनशाली इन्द्र! हमें सुन्दर और अगणित गायों तथा अओं द्वारा उत्तम धनवान् बनाओ. (७)
The omnipresent Lord, who sustains the universe, is the source of all knowledge and the protector of all beings. He is the one who is born in many ways, yet remains unborn.
हे अग्नि! तुम अंगिरा गोत्र वाले ऋषियों में प्रथम एवं सर्वश्रेष्ठ हो. तुम बुद्धिमान् हो और देवों के यज्ञों को सुशोभित करते हो. तुम सारे संसार पर अनुग्रह के लिए अनेक रूप से व्याप्त हो. तुम मेधावी एवं दो लकड़ियों से उत्पन्न हो. मनुष्यों का कल्याण करने के लिए तुम भिन्न-भिन्न रूपों में सब जगह रहते हो. (२)
O Agni, firstborn of Matarishvan, you manifested with great power for Vivashvan. The heavens and earth trembled at your brilliance, the divine offering, and your immense glory.
हे अग्नि! तुम वायु की अपेक्षा प्रमुख हो और यजमान के निकट सुंदर यज्ञ को पूर्ण करने की इच्छा से प्रकट हो जाओ. तुम्हारी सामर्थ्य देखकर धरती और आकाश कांप उठते हैं. तुमने श्रेष्ठ होता के रूप में यज्ञ का कार्य स्वीकार किया है. तुम्हारे यज्ञ में निवास के कारण पूज्य देवताओं के यज्ञ पूर्ण हुए हैं. (३)
O Agni, you are the protector of humanity, the bestower of good deeds. You are the one who drinks the offerings, and we bring you back to the altar for the sacrifice.
हे अग्नि! तुमने मनु पर अनुग्रह करके यह बताया था कि किन कर्मों से स्वर्ग मिलता है. तुमने अपने सेवक पुरुषरवा को शोभन फल दिया. दोनों काष्ठ तुम्हारे माता-पिता हैं. उनके घर्षण से तुम उत्पन्न होते हो. ऋत्विज तुम्हें पहले वेदी के पूर्व भाग में ले जाते हैं, बाद में पश्चिम भाग में. (४)
You, O Agni, are the powerful bull, the sustainer of nourishment, the bestower of glory. You, who know the offerings and their forms, enter the homes of all beings.
हे अग्नि! तुम अभिलाषाओं को पूर्ण करने वाले हो एवं यजमान को धन आदि से पुष्ट करते हो. हे एकमात्र अन्नदाता! जो यजमान यज्ञपात्र उठाते हुए तुम्हारा यश गाता है एवं वृष्ट्कार शब्द के साथ तुम्हें आहुति देता है, तुम उसे पहले प्रकाश देते हो, उसके बाद सारे संसार को. (५)
O Agni, you who are all-seeing and pervade all, you protect the man who offers you pure Soma, and you increase his wealth and strength.
हे विशिष्ट ज्ञानसंपन्न अग्नि! तुम सदाचारहीन मनुष्य को ऐसे काम में लगाते हो, जिससे उसका उद्धार हो सके. जब विस्तृत युद्ध चारों ओर भली-भांति आरंभ हो जाता है तो तुम्हारी कृपा से थोड़ी संख्या वाले एवं वीरताशून्य लोग बड़े-बड़े वीरों का वध कर डालते हैं. (६)
O Agni, you bestow immortality and supreme glory upon mortals, and you bring forth joy for both worlds, shining like the sun.
हे अग्नि! जो मनुष्य तुम्हारी सेवा करता है, उसके लिए तुम अन्न प्रदान करने हेतु उत्तम और स्थायी पद पर प्रतिष्ठित कर देते हो। जो यजमान मनुष्यों एवं पशुओं को प्राप्त करने के लिए अत्यंत उत्सुक है, उस बुद्धिमान् यजमान को तुम सुख और अन्न दो। (७)
O Agni, praised by us, make us prosperous and glorious. May the gods, heaven and earth, protect us with new strength and deeds.
हे अग्नि! हम तुम्हारी स्तुति करते हैं. तुम हमें धन एवं यश देने वाला तथा यजकर्म करने वाला पुत्र प्रदान करो. तुम्हारे द्वारा दिए गए नवीन पुत्र से हम पराक्रम में उन्नति करेंगे. हे धरती और आकाश! तुम अन्य देवों के साथ मिलकर हमारी ठीक से रक्षा करो. (८)
O Agni, divine and ever-vigilant among gods, you are like a father to us. You bestow prosperity and possess all wealth, granting us strength and well-being.
हे दोपरहित अग्नि! तुम सब देवों की अपेक्षा जागरूक हो. तुम अपने माता-पिता धरती-आकाश के पास रहकर अनुग्रह के रूप में हमें पुत्र दो एवं यजकर्ता यजमान के प्रति प्रसन्नचित्त रहो. हे कल्याणकारक! तुम यजमान के लिए सभी प्रकार की संपत्ति प्रदान करो. (९)
I shall declare the mighty deeds of Indra, the first ones performed by the Vritra-slayer. He struck down the serpent, split open the waters, and shattered the mountains.
मैं वज्रधारी इंद्र के पूर्वकृत पराक्रमों का वर्णन करता हूं. उसने मेघ का वध किया. इसके पश्चात् जलों को धरती पर गिराया. इसके बाद बहती हुई पहाड़ी नदियों का मार्ग बदल दिया. (१)
The sun, like a mountain peak, forged the thunderbolt for Indra. The waters, like cows, flowed down to the ocean.
इंद्र ने पर्वत पर आश्रय लेने वाले मेघ का वध किया. त्वष्टा ने इंद्र के लिए भली प्रकार फेंका जाने वाला वज्र बनाया. इसके बाद जल की वेगवती धाराएँ उसी प्रकार समुद्र की ओर गईं थीं, जिस प्रकार रंभाती हुई गाएं बछड़ों वाले घर की ओर जाती हैं. (२)
The mighty Indra, desiring strength, chose Soma and drank it in the three sacred places. With his thunderbolt, he then slew the serpent Vritra, the firstborn of the Ahi.
इंद्र ने बैल के समान तेजी से सोम ग्रहण किया. ज्योतिष्टोम, गोमेध और आयु इन विविध यज्ञों में चुआया हुआ सोमरस इंद्र ने पिया. धन के स्वामी इंद्र ने वज्ररूपी बाण ग्रहण करके सर्वप्रथम उत्पन्न मेघ का वध किया था. (३)
The mighty Indra, who first slew the Vritra, the deluder, the enemy of the gods, brought forth the dawn and the sun, and thus never found a foe.
हे इंद्र! जब तुमने प्रथम उत्पन्न मेघ का वध किया था, तभी मायाधारियों की माया भी समाप्त कर दी थी. इसके पश्चात् तुमने सूर्य, आकाश एवं उषा को प्रकाशित किया था. इसके बाद तुम्हारा कोई शत्रु दिखाई नहीं दिया. (४)
Indra, with his great thunderbolt, slew Vritra. The serpent, cut down like branches by an axe, lies prostrate on the earth.
इन्द्र ने संसार में अंधकार फैलाने वाले शत्रु को महाविनाशकारी वज्र द्वारा हाथ काटकर मारा था, जिस प्रकार कुल्हाड़ी से काटी हुई शाखा गिर पड़ती है, उसी प्रकार वृत्र धरती पर सोया हुआ था. (५)
Mandala 1 · Verse 6
अयोद्धेव दुर्मदं आ हि जुझे महावीर्ं तुविबाधमृजीषम्, नातादीदृस्य स्मृतिं वर्धानां सं रुजानाः पिपिष इन्द्रशत्रुः.. (६)
The mighty Indra, like an unconquerable fortress, has been invoked to battle, a powerful warrior who crushes all opposition. His strength, ever-increasing, is like a grinding stone that pulverizes enemies, leaving them utterly defeated.
अहंकारी वृत्र ने यह समझकर इन्द्र को ललकारा कि मेरे समान कोई योद्धा है ही नहीं. इन्द्र महान् पराक्रमी, बहुतों का ध्वंस करने वाले एवं शत्रुविजायी हैं. वृत्र इन्द्र के विनाश से बच नहीं सका. इन्द्र के शत्रु वृत्र ने गिरते समय नदियों के किनारे भी नष्ट कर दिए. (६)
When Indra, with his thunderbolt, struck the chest of the unresisting and unresisting foe, the mighty ones, seeking to rival him, were scattered in many directions.
बिना हाथपैर वाले वृत्र ने इन्द्र को युद्ध में ललकारा. इन्द्र ने पहाड़ की चोटी के समान वृत्र के पृष्ठ कंठ में वज्र मारा. जिस प्रकार शक्तिशाली पुरुष की समानता करने वाले बलहीन व्यक्ति का प्रयत्न व्यर्थ जाता है, वही दशा वृत्र की हुई. वह कई जगह घायल होकर धरती पर गिर पड़ा. (७)
Mandala 1 · Verse 8
नदं न भिन्नममुया शयानं मनो रुहाणा अति यन्त्यापः. याश्चिद् वृत्रो महिमा पर्यतिष्ठतासामहिः पत्सुतः शीर्षभूव.. (८)
The waters, not broken, flowing over the sleeping mind, surpass it. The greatness of Vritra, which encompassed them, was overcome by the son of the earth.
सुंदर जल धरती पर पड़े हुए वृत्र को लांघकर उसी प्रकार आगे जा रहा है, जिस प्रकार सरिता टूटे हुए किनारों को पार करके बहती है. वह जीवित अवस्था में अपनी शक्ति से जिस जल को रोके हुए था, इस समय वह उसी जल के नीचे सो गया है. (८)
May you two, ever new and powerful, become the bestowers of gifts, the source of sustenance, and the object of praise for the wise.
हे बुद्धिमान् अश्विनीकुमारो! तुम हमारे लिए आज तीन बार आओ. तुम्हारे रथ और दान व्यापक हैं. जिस प्रकार रश्मियों वाला सूर्य शीतल रात्रि से संबंधित है, उसी प्रकार तुम दोनों का भी नियमित संबंध है. तुम कृपा करके विद्वानों के वश में हो जाओ. (१)
The divine Sun, the sustainer, travels through the lowlands and highlands, and with auspicious rays, he dispels all darkness and evil.
देवता प्रवता (नीचे की ओर) जाते हैं, उद्गता (ऊपर की ओर) जाते हैं, शुभ (सफेद) और हरिभ्याम् (हरे) घोड़ों से यजन करते हुए जाते हैं। सविता देव दूर से आते हैं और सभी दुःखों को दूर करते हैं। (३)
The radiant Sun, the source of all, adorned with diverse splendors, sustains the vast universe, illuminating it with golden light.
अभिभूत (सबको वश में करने वाले), कृशने (सबको भस्म करने वाले), विश्वरूप (सब रूपों वाले), हिरण्यशम (स्वर्ण से युक्त), बृहन्तम् (महान) यजन करते हुए, चित्रभानु (अनेक किरणों वाले) सविता देव, कृष्णां रजसि (अंधकारमय रात्रि में) तविषं (बल) धारण करते हुए, रथ पर आरूढ़ होते हैं। (४)
The divine chariot of the Sun, with its shining wheels and golden yoke, carries all the worlds, resting upon its celestial expanse.
जिनके पैर सफेद हैं, वे हिरण्य (स्वर्ण) के पहियों वाले रथ को ले जाते हैं। हे सविता! आपके ऊपर स्थित होकर, विश्व के सभी भुवन (लोक) तरस्थुः (पार करते हैं)। (५)
The three heavens, visible to the Sun, and the one realm of Yama, are vast. Let him who knows this speak of the chariot wheel that rolls through the cosmic order.
सविता की दृष्टि से तीन द्युलोक (स्वर्ग, मध्यलोक, पाताल) उपस्थ (पास) हैं, और एक यमलोक में विराषट् (विराजमान) है। जो इसे जानता है, वह कहे कि रथ के पहियों के समान ये तीन लोक और यमलोक भी अमृत को पार करते हैं। (६)
I praise with hymns and praises the divine Agni, the best among men, who is worshipped by the devout.
देवानां कामनं कुरुवन्तः प्रजानां परं अनुग्रहं निमित्तं सूकरूपी वचनो द्वारा महान् अग्नि की प्रार्थना करते हैं. अन्य ऋषिगण भी इसी अग्नि की स्तुति करते हैं. (१)
O Agni, those who offer oblations to you, the giver of strength, are filled with your power. May you, well-disposed, protect us today, and may our offerings be abundant.
यज्ञ करने वाले लोगों ने शक्तिवर्धक अग्नि को धारण किया था. हे अग्नि! हम लोग हवि लेकर तुम्हारी सेवा करते हैं. तुम अन्नदान में तत्पर हो. आज इस यज्ञ में हम पर परम प्रसन्न होकर हमारे रक्षक बनो. (२)
We choose You, O Messenger, the Invoker, the All-Knowing. Your greatness is revealed by Your radiant splendors, which reach the heavens.
हे अग्नि! तुम यज्ञ के होता एवं सर्वज्ञ हो. हम तुम्हें देवों का दूत समझकर वरण करते हैं. तुम महान् और नित्य हो. तुम्हारी चमक बढ़ती है. तुम्हारी किरणें आकाश को छूती हैं. (३)
Agni, with you as our messenger, Varuna, Mitra, and Aryama, the gods, will surely conquer all wealth for the mortal who possesses you.
हे अग्नि! वरुण, मित्र और अर्यमा—ये तीनों देव तुम्हें अपना प्राचीन दूत समझकर भली प्रकार चमकाते हैं. जो यजमान तुम्हें हवि देता है, वह तुम्हारे द्वारा सभी प्रकार की संपत्ति जीत लेता है. (४)
The priest, the householder, Agni, you are the messenger of all. In you are gathered all the firm vows that the gods have made.
हे अग्नि! तुम देवों को बुलाने वाले, यजमान रूप प्रजाओं के पालक एवं हर्षित करने वाले हो. तुम देवताओं के दूत हो. पृथ्वी आदि देवता जो स्थिर कर्म करते हैं, वे तुम में मिल जाते हैं. (५)
O Agni, most youthful and auspicious, accept this offering, for all the gods are invoked by it. May you, with a benevolent mind, grant us strength and prosperity.
हे युवक अग्नि! तुझ परम् सौभाग्यशाली को लक्ष्य करके सब हव्य दिए जाते हैं. तुम प्रसन्न मन होकर आज, कल और सर्वदा सुंदर एवं शक्तिशाली देवों का यज्ञ करो. (६)
Mandala 1 · Verse 7
तं घमिश्था नमस्विन् उप स्वराजमास्ते. होत्राभिरग्निं मनुष्यः समिन्धते तितिवर्वा सो अति सिधः.. (७)
The one who is honored and worships, reigns supreme. By offerings, humans ignite the divine fire, which is the powerful and victorious protector.
यजमानं नमस्कारं कृते हुए अपने आप चमकने वाले उसी अग्नि को हवि देकर उपासना करते हैं. शत्रु को करारी हार देने के इच्छुक लोग होताओं द्वारा अग्नि को प्रज्वलित करते हैं.(७)
They, the destroyers of obstacles, made vast space for dwelling. The powerful one, invoked by praise, became manifest in the cows' pasture.
हे अग्नि! तुम्हारी सहायता से देवों ने वृत्र को मारकर रहने के लिए स्वर्ग, पृथ्वी और आकाश को विस्तृत किया. जिस प्रकार संग्राम में हिन् हिनाता हुआ घोड़ाएं प्राप्त करता है, उसी प्रकार भली प्रकार बुलाए जाने पर तुम कण्व ऋषि के लिए इच्छानुसार धन बरसाओ. (८)
O Agni, radiant and most divine, settle yourself and blaze forth with purifying smoke. Shine forth, O worthy one, with your brilliant, visible light.
हे अग्नि! तुम भली प्रकार बैठो. तुम महान् हो. तुम देवताओं की प्रबल इच्छा करते हुए जलो. हे बुद्धिमान् एवं प्रशंसनीय अग्नि! तुम इधर-उधर फैलने वाले धुएं को विशेष रूप से बनाओ.(९)
O bearer of oblations, whom the gods have established for man as the most worshipful, whom Kanva has praised, whom the strong and the lauded have invoked.
हे हव्यवाहक अग्नि! समस्त देवों ने मनु के लिए इस यज्ञस्थल में तुझ परम पूज्य अग्नि को धारण किया था. कण्व ने पूज्य अतिथियों के साथ धन द्वारा प्रसन्न करने वाले तुझ अग्नि को धारण किया था. वर्षा करने वाले इंद्र एवं अन्य स्तुतिकर्ताओं ने भी तुम्हें धारण किया था. (१०)
We praise this Agni, kindled by the Rishis from Truth, whose brilliance shines forth, and to whom these hymns are sung.
पूज्य अतिथियों वाले कण्व ने जिस अग्नि को सूर्य से लेकर प्रज्वलित किया था, उसी अग्नि की फैलने वाली किरणें चमक रही हैं. हमारी ये ऋचाएं तथा हम उसी अग्नि को बढ़ाते हैं.(११)
Mandala 1 · Verse 12
रायस्पृधं स्वधावोऽस्ति हि तेऽग्ने देवेषुयम्. त्वं वाजस्य श्रुत्यस्य राजसि स नो मूळ महों असि.. (१२)
O Agni, you are the wealth-possessor, the lord of sustenance, and the king of abundant food. You are our strength and our great protector.
हे अन्न सहित अग्नि! हमें धन दो. तुम्हारी देवों से मित्रता है, तुम प्रसिद्ध अन्न के स्वामी एवं महान् हो. तुम हमें सुखी बनाओ.(१२)
May the divine Sun, the bestower of life, stand radiant for our upliftment. May he, the gatherer of sustenance, be with us as we are invigorated by his light.
हे सविता देव! तुम ऊपर की ओर उठो। तुम वाज (अन्न) के दाता हो, हम तुम्हें स्तुतियों से प्राप्त करते हैं।
May our strength be uplifted by your banner, consuming all our sins. Grant us the ability to live a life of purpose and service, recognized by the divine.
हे अग्नि! तुम हमारे पापों को अपने प्रकाश से भस्म कर दो। हमें ऊपर की ओर ले चलो, जिससे हम देवताओं के बीच में सुखपूर्वक रहें।
Agni, the light for humanity, was placed by Manu. The radiant, truth-born Agni, whom all people worship, shines forth.
हे प्रकाशरूप अग्नि! मनु ने समस्त जातियों के कल्याण के लिए तुम्हारी स्थापना की थी। हे अग्नि देव! तुमने यज्ञ के निमित्त उत्पन्न होकर हव्य से तृप्ति प्राप्त की और कण्व को प्रकाश दिया। मनुष्य तुम्हें नमस्कार करते हैं। (१९)
O Agni, your blazing flames become fierce and awe-inspiring, consuming all evil and darkness. You protect us, burning away all that is unholy.
अग्नि की ज्वालाएं चमकीली, शक्तिशाली और भयानक हैं। इसलिए उसे कोई नष्ट नहीं कर सकता। हे अग्नि देव! राक्षसों, यतुधानों एवं हमारे विश्व भक्षक शत्रुओं को जलाओ। (२०)
Mandala 1 · Verse 21
tad viprāso vipanyavo jāgṛvāṁsaḥ sam indhate | viṣṇor yat paramam padam
Praise the cows, the playful, the giver of strength, the wind. The essence of the earth has grown in the jaws.
हे ऋत्विजो! दूध देने वाली गायों के बीच स्थित मरुदगणों के अविनाशी, विहर्षशील एवं सहन करने योग्य तेज की प्रशंसा करो. वह तेज गाय का दूध पीने के कारण बढ़ा है. (५)
Mandala 1 · Verse 6
को वो वर्षिष्ठ आ नरो दिवश्व गभ्भ् धूतयः यत्सीम्न्तं न धुनुथ.. (६)
O heroes, who among you is the greatest, who has come from the sky, who shakes the very foundations of the earth?
हे वायुओ! तुम इतने बलवान हो कि तुम सब को हिलाते हो, तुम सब को क्यों नहीं हिलाते हो? (६)
The mountain, the great peak, bows down to the powerful, fierce spirit that moves us.
हे मरुद्गणो! तुम्हारे चलने से घर गिर पड़ेगा, इस भय से लोगों ने घरों में मजबूत खंभे गाड़े हैं. तुम्हारी चाल उग्र एवं झकझोरने वाली है. तुम्हारी तेज चाल से चोटियों वाले अनेक पर्वत हिल जाते हैं. (७)
The Earth, like a queen, trembles in fear within His realms.
हे मरुद्गणो! तुम्हारी चाल सभी पदार्थों को दूर फेंक देती है. वृद्ध एवं दुर्बल राजा शत्रु के भय से जिस प्रकार कांपता है, उसी प्रकार तुम्हारे चलने से धरती कांपती है. (८)
Their strength is steady, like the mother's milk that nourishes, for their might is swift and unhindered.
मरुतों की उत्पत्ति का स्थान आकाश स्थिर रहता है. आकाश मरुतों की माता के समान है. आकाश में होकर पक्षी निकल सकते हैं. मरुतों का बल धरती और आकाश को पृथक् करता है. (९)
Mandala 1 · Verse 24
sam māgne varcasā sṛja sam prajayā sam āyuṣā | vidyur me asya devā indro vidyāt saha ṛṣibhiḥ
Mandala 1 · Verse 1
कद्ध नूनं कथप्रियः पिता पुत्रं न हस्तयोः । दधिध्वे वृकबर्हिषः ।। (१)
Why does the father, who loves to tell stories, not hold his son in his hands? You have been given the strength of the wolf.
हे मरुद्गणो! प्रार्थना चाहने वाले तुम लोगों के लिए कुश बिछा दिए गए हैं. जिस प्रकार पिता पुत्र को हाथों पर धारण करता है, क्या तुम भी हमें उसी प्रकार धारण करोगे? (१)
Mandala 1 · Verse 2
क्व नूनं कद्धो अर्थ गन्ता दिवो न पृथिव्याः । क्व वो गावो न रण्यन्ति ।। (२)
Where indeed is the meaning that departs from heaven and earth? Where are your cows that do not roam?
हे मरुद्गणो! इस समय तुम कहां हो? तुम इस यज्ञ में कब आओगे? तुम यहां आकाश से आओ, धरती से मत आना. जिस प्रकार गाएं रंभाती हैं, उसी प्रकार यजमान तुम्हें यहां बुलाते हैं. (२)
Even if you are born from a mother, you can still become immortal through devotion.
हे ष्षि नामक धेनु के पुत्र मरुद्गण! यद्यपि तुम मरणधर्मा हो, पर तुम्हारी स्तुति करने वाला अमर होगा. (४)
Mandala 1 · Verse 5
मा वो मृगो न यवसे जरिता भूदजोष्यः । पथा यमस्य गाडुप ।। (५)
May the unaging singer not be consumed by the wolf like grass; may he reach the path of Yama.
घास के बीच में मृग जिस प्रकार सेवारहित नहीं रहता, अपितु घास खाता है, उसी प्रकार तुम्हारी स्तुति करने वाले तुम्हारी सेवा से कभी शून्य न हों. इस प्रकार वे यमराज के मार्ग पर नहीं जाएंगे. (५)
The truthful ones, the powerful Rudras, pierce through the darkness, bringing forth the dawn.
रुद्र द्वारा पालित, दीप्तिसंपन्न एव बलशाली मरुद्गण मरुस्थल में भी वापुरहित वर्षा करते हैं, यह बात सत्य है. (७)
Mandala 1 · Verse 8
वाश्मेव विद्युन्निमाति वत्स न माता सिभक्ति. यदेषां वृष्टिसर्ज.. (८)
Just as the mother cow nourishes her calf with milk, so the clouds, like a mother, bestow rain upon the earth.
दूध भरे स्तनों वाली रंभाती हुई गाय के समान बिजली गरजती है. गाय जिस तरह बछड़े को चाटती है, उसी प्रकार बिजली मरुद्गणों की सेवा करती है. इसी के फलस्वरूप मरुद्गणों ने वर्षा की है. (८)
Let us praise Brahmanaspati with pure words, as Agni, the friend, is seen.
हे ऋत्विजों! मंत्र के पालक मरुद्गण, अग्नि एवं दर्शनीय मित्र की प्रार्थना के लिए हमारे सामने ऐसे मंत्रों से स्तुति करो जो उन देवताओं का स्वरूप बताने वाले हों. (१३)
Arise, O Lord of Brahman, for these devotees are here to worship you. May the generous Maruts approach, and may Indra, swift and powerful, join us.
हे बृहस्पति! हम पर अनुग्रह करने के लिए अपने निवासस्थान से उठो. देवताओं की इच्छा करने वाले हम तुमसे याचना करते हैं. सुंदर दान करने वाले मरुद्गण तुम्हारे समीप जावें. हे इंद्र! तुम बृहस्पति के सोम रस का सेवन करो. (१)
Mandala 1 · Verse 2
त्वामिद्धि सहसस्पुत्र मर्त्य उपब्रूते धने हिते। सुवीर्यं मरूत आ स्वस्यं दधीत यो व आचके.. (२)
O son of Strength, mortals invoke you for wealth and protection. The Maruts, who have sought your strength, possess great valor.
हे परम बल पालक! शत्रुओं के बीच फंसे हुए धन को प्राप्त करने के लिए मनुष्य तुम्हारी ही स्तुति करते हैं. हे मरुद्गणो! धन का इच्छुक जो मनुष्य, बृहस्पति सहित तुम्हारी स्तुति करता है, वह सुंदर अश्व एवं शोभन वीर्य संपत्र धन प्राप्त करता है. (२)
May Brahmanaspati, the lord of prayer, and the truthful, auspicious divine speech lead us to a heroic, strong, and bountiful sacrifice.
हे बृहस्पति एवं प्रिय सत्य रूपा वाग्देवी हमें प्राप्त हों. बृहस्पति आदि देव वीर शत्रुओं को हमसे बहुत दूर ले जावें एवं हमें मानव हितकारी तथा द्रव्यपूर्ण यज्ञों में ले जावें. (३)
Mandala 1 · Verse 4
यो वाघते ददाति सुनरं वसु स धते अक्षिति श्रवः। तस्मा इळां सुवीरामा यजामहे सुप्रतूर्तिंमहेसम्.. (४)
He who gives abundant wealth to the speaker, attains imperishable fame. For him, we worship the nourishing and heroic offering, the most excellent wealth.
जो वाघते कदापि सुनरं वसु स धते अक्षिति श्रवः। तस्मा इळां सुवीरामा यजामहे सुप्रतूर्तिंमहेसम्.. (४)
Mandala 1 · Verse 7
को देवयन्तमश्वं वजनं को वृषभं प्रप दाक्षान्युपस्थिातान्तर्वत्सवक्षयं दधे.. (७)
Who is the divine horse, the vigorous bull, who has brought forth the nourishing sustenance and the flowing milk?
देवों की अभिलाषा करने वाले एवं यज्ञ के निमित्त कुश तोड़ने वाले बृहस्पति के अतिरिक्त कौन देवता आ सकता है? हव्यदाता यजमान ऋत्विजों के साथ भांति-भांति की संपत्तियों से युक्त घर से निकलकर यज्ञस्थल की ओर प्रस्थान कर चुके हैं. (७)
He who protects the kingdom and its people, and is firm in his resolve, is never defeated by enemies. Such a powerful ruler, like the thunderbolt-wielder, possesses no equal in wealth or strength.
बृहस्पति अपने शरीर में शक्ति का संचय करें. वे वरुण आदि राजाओं के साथ शत्रुओं का नाश करते हैं एवं भयानक युद्ध में भी डटे रहते हैं. वज्रधारी बृहस्पति को प्रभूत घर प्राप्ति के लिए होने वाले बड़े अथवा छोटे युद्ध में प्रेरित या उत्साहहीन करने वाला दूसरा नहीं है. (८)
O generous Maruts, hear this hymn, you who are nourished by Agni's tongue. May Varuna, the steadfast vow-keeper, drink Soma, accompanied by the Ushas and the Ashvins.
मरुतगण स्तुति सुनें। सुदान (दानशील) अग्नि अपनी जिह्वा से (सोम) पिये। धृतव्रत (नियम का पालन करने वाले) वरुण, अश्विनीकुमार और उषा अपने साथ सोम का पान करें। (१४)
May we be united with the great, all-beautiful King, with His abundant blessings and His all-conquering might, and with His strength in the battle of life.
सं नो राया बृहता विश्वपेशसा मिमिश्वा समिळाभिरा. सं धुम्नेन विश्वतुरोभो महि सं वाजेर्वाजिनिवति.. (१६) हे उषा! हमें प्रभूत एवं अनेक रूप धन एवं गाएं दान करो. हे पूज्य उषा! हमें सब शत्रुओं का नाश करने वाला यश दो. हे अन्न साधन की क्रिया से संपन्न उषा! हमें धन दो.
Mandala 1 · Verse 17
saṁ nu vocāvahai punar yato me madhv ābhṛtam | hoteva kṣadase priyam
Mandala 1 · Verse 18
darśaṁ nu viśvadarśataṁ darśaṁ ratham adhi kṣami | etā juṣata me giraḥ
Mandala 1 · Verse 19
imam me varuṇa śrudhī havam adyā ca mṛḻaya | tvām avasyur ā cake
Mandala 1 · Verse 20
tvaṁ viśvasya medhira divaś ca gmaś ca rājasi | sa yāmani prati śrudhi
Mandala 1 · Verse 21
ud uttamam mumugdhi no vi pāśam madhyamaṁ cṛta | avādhamāni jīvase